कालसर्प दोष निवारण
पूजा उज्जैन
राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से मुक्ति हेतु उज्जैन के पावन शिप्रा तट पर विशेष शांति अनुष्ठान। पंडित लोकेन्द्र कृष्ण शर्मा — 24+ वर्षों का अनुभव।
🐍 कालसर्प दोष क्या है?
जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सभी 7 मुख्य ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तो इस विशेष स्थिति को कालसर्प दोष कहते हैं।
राहु को "काल" और केतु को "सर्प की पूंछ" माना गया है। इन दोनों के बीच ग्रह फँसने से जातक का भाग्य एक सीमा में बंध जाता है — चाहे वह कितनी भी मेहनत करे, पूर्ण फल नहीं मिलता।
यह दोष जातक के व्यापार, स्वास्थ्य, विवाह और पारिवारिक जीवन को गहराई से प्रभावित करता है।
💡 उज्जैन में विशेषता: शिप्रा नदी के तट पर राहु-केतु की पूजा अत्यंत फलदायी मानी गई है। यहाँ का पावन वातावरण इस दोष की शांति के लिए विशेष रूप से अनुकूल है।
⚠️ कालसर्प दोष के लक्षण
यदि आपके जीवन में इनमें से कुछ लक्षण हों तो कुंडली जांच अवश्य करवाएं
अपनी कुंडली में कालसर्प दोष जांचें
जन्म तिथि, समय और स्थान बताएं — पंडित जी निशुल्क परामर्श देंगे।
📊 कालसर्प दोष के 12 प्रकार
राहु जिस भाव में हो उसके अनुसार दोष का नाम और प्रभाव निर्धारित होता है
| दोष का नाम | राहु का भाव | मुख्य प्रभाव |
|---|---|---|
| अनंत कालसर्प | प्रथम (लग्न) | स्वभाव में अस्थिरता, आत्मविश्वास की कमी |
| कुलिक कालसर्प | द्वितीय (धन) | आर्थिक हानि, पारिवारिक विवाद |
| वासुकी कालसर्प | तृतीय (भाई) | भाई-बहन से कलह, साहस में कमी |
| शंखपाल कालसर्प | चतुर्थ (सुख) | घर में अशांति, माता से विवाद |
| पद्म कालसर्प | पंचम (संतान) | संतान में बाधा, शिक्षा में कठिनाई |
| महापद्म कालसर्प | षष्ठ (शत्रु) | शत्रु-बाधाएं, कर्ज की समस्या |
| तक्षक कालसर्प | सप्तम (विवाह) | वैवाहिक कलह, साझेदारी में नुकसान |
| कर्कोटक कालसर्प | अष्टम (आयु) | दुर्घटना का भय, गुप्त शत्रु |
| शंखचूड़ कालसर्प | नवम (भाग्य) | भाग्य का साथ न देना, धर्म-कर्म में बाधा |
| घातक कालसर्प | दशम (कर्म) | करियर में बाधाएं, मान-सम्मान की हानि |
| विषधर कालसर्प | एकादश (लाभ) | आय में रुकावट, मित्रों से धोखा |
| शेषनाग कालसर्प | द्वादश (व्यय) | अनावश्यक व्यय, विदेश में कष्ट |
🕉️ पूजा विधि — शिप्रा तट उज्जैन
पूर्ण शास्त्रीय विधि — 3 चरणों में संपन्न
नाग पूजन
राहु-केतु के प्रतीक स्वरूप नाग की विशेष पूजा। दूध, पुष्प और विशेष सामग्री से अभिषेक किया जाता है।
राहु-केतु मंत्र जाप
108 बार शुद्ध राहु-केतु मंत्रों का उच्चारण। शिप्रा नदी के पावन तट पर विशेष स्थान पर।
हवन एवं विसर्जन
पूर्णाहुति हवन के बाद शिप्रा जल में विसर्जन। दोष पूर्णतः शांत होता है।
🐍 राहु शांति मंत्र
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
108 बार शनिवार को जाप करें — काले तिल और काले वस्त्र अर्पित करें
✨ पूजा के बाद मिलने वाले लाभ
व्यापार में उन्नति
व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं, नए अवसर मिलते हैं और आर्थिक स्थिति सुधरती है।
विवाह बाधा निवारण
वैवाहिक जीवन में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
स्वास्थ्य लाभ
लंबे समय से चली आ रही बीमारियों से मुक्ति और शारीरिक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
मानसिक शांति
भय, चिंता, बुरे सपने और अकारण तनाव से मुक्ति मिलती है।
पारिवारिक सुख
घर में चल रही कलह समाप्त होती है और पारिवारिक संबंध मधुर बनते हैं।
भाग्य का उदय
रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं, भाग्य साथ देता है और जीवन में प्रगति होती है।
शिप्रा तट पर कालसर्प दोष पूजा बुक करें
पंडित लोकेन्द्र जी — 24+ वर्षों के अनुभव के साथ शास्त्रीय विधि से पूजा संपन्न करवाएं।
🙏 श्रद्धालुओं के अनुभव
कालसर्प दोष के कारण वर्षों से व्यापार में हानि हो रही थी। पंडित लोकेन्द्र जी की पूजा के बाद व्यापार में अच्छी प्रगति हो रही है।
बार-बार सांप के सपने आते थे। पंडित जी ने तक्षक कालसर्प दोष बताया — पूजा के बाद सब ठीक हो गया।
5 साल से विवाह में बाधा आ रही थी। पंडित जी ने कालसर्प दोष का पता लगाया और पूजा के 3 महीने बाद विवाह हो गया।
पंडित जी बहुत ही विद्वान और सरल स्वभाव के हैं। पूजा पूर्ण विधि से हुई। नौकरी में पदोन्नति भी हुई।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पंडित लोकेन्द्र कृष्ण शर्मा
उज्जैन के प्रसिद्ध वैदिक कर्मकांडी एवं ज्योतिषाचार्य। 24+ वर्षों से कालसर्प दोष, मंगल दोष और वैदिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ। शिप्रा तट, उज्जैन में सेवारत।
कालसर्प दोष से मुक्ति पाएं — आज ही बुक करें
पंडित लोकेन्द्र कृष्ण शर्मा जी से निशुल्क परामर्श प्राप्त करें। उज्जैन के शिप्रा तट पर पूर्ण शास्त्रीय विधि से अनुष्ठान संपन्न करवाएं।